Internet क्या है? Internet कैसे चलता है, जानते है क्या ? ~ Sikho Tech

Internet क्या है? Internet कैसे चलता है, जानते है क्या ?


इंटरनेट क्या है

Internet क्या है? Internet कैसे चलता है, जानते है क्या ?

इंटरनेट नाम की वला के बारें में आज हम सभी जानते हैहमारे बीच इंटरनेट आज के समय में सबसे जरुरी हो गया है. जिसको इसका एक बार नशा लग गया उसके सिर चढ़ कर बोलता है.  अगर आपने इसकी एक बार  शुरुआत कर दी तो आपका बिना इंटरनेट के आज के समय में काम नहीं चल सकता है. हम सभी रोजाना ही इसका इस्तेमाल करते है. इसी की मदद से अपनी पसंद की वेबसाइट को मोबाइल पर देख या पढ़ पाते है. मगर क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है, कि इंटरनेट कब दुनिया के बीच आया और छा गया. इसकी मदद से जो आप बड़ी से बड़ी जानकारियां चुटकी में जान लेते है वो आप तक पहुचती कैसे है ?
नहीं ना ! चलिये कोई बात नहीं जायदातर लोग नहीं जानते है इसके बारें में, तों हम आपको बताते है कि इंटरनेट की दुनिया काम कैसे करती है. हममे से जायदातर लोगो के दिमाग में इंटरनेट का नाम आते ही सोचने लगते है कि इंटरनेट सैटलाइट से चलता है आप अगर भी ऐसा सोचते है तो गलत सोचते है.
आप इस पोस्ट को पढ़िए. आपको कई सवाल के जवाब मिल जायेगें. इंटरनेट की यह दुनिया बड़ी ही रोचक है आप जान कर हैरान हो जाएगे. तो पहले इंटरनेट के बारे में बताते है.

इंटरनेट क्या है -

दरअसल इंटरनेट एक ग्लोबल नेटवर्क है जिसमे हजारों कंप्यूटर आपस में जुड़े हुए है इनकी मदद से ही इनफार्मेशन आप तक पहुचती है. 1969 में सबसे पहले US 'Advanced Research Projects Agency (ARPA)' के कंप्यूटर्स को आपस में कनेक्ट किया था. धीरे धीरे ये ARPANET ग्रो होने लगा. मॉडर्न इन्टरनेट 1989 में आए 'वर्ल्ड वाइड वेब' (www) की देंन है. ये www आज आपको सभी वेबसाइट के नाम से पहले मिल जाएगा. आगे चलकर वर्ल्ड वाइड वेब के जरिये ही हाइपरटेक्स्ट लिंक्स को एक दुसरे से कनेक्ट किया जाने लगा. बाद में धीरे धीरे इन कंप्यूटर को आपस में केबल्स से दूसरी जगहों पर से कनेक्ट किया जाने लगा.

केबल्स की भूमिका

अब हमनें ये तो जान लिया कि इंटरनेट का जन्म कैसे हुआ. अब ये जानना रह गया की इंटरनेट हम तक पहुचता कैसे है. इसके लिए हजारों किलोमीटर लंबी फैली केबल्स हमारी मदद करती है. एक जगह से दूसरी जगह डाटा ट्रांसफर करने के लिए फाइबर केबल्स की अहम् भूमिका है. अपने Optical Fiver Cables का नाम तो सुना होगा. इन केबल्स को जमीन के अंदर बिछाया जाता है. इन्हें ही 'सबमरीन केबल्स' भी कहते है. इन केबल्स के जाल को तीन प्रकार से होता है, जिन्हें TR-1 Company, TR-2 Company, TR-3 Company कहते है. हमारे आस पास TR-2 Company या TR-3 Company की केबल्स बिछी है. TR-1 Company की केबल्स विभिन्न देशों को आपस से कनेक्ट करती है. 
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इंटरनेट देखा जाये तो एक तरह से पूरा Free है इसमें बस आपको दो कंप्यूटर को जोड़ने के लिए केबल्स का खर्चा करना होता है. मान लीजिए आप अपने घर को ऑफिस से कनेक्ट करना चाहते है तो आप अपने घर के कंप्यूटर को ऑफिस के कंप्यूटर से, केबल्स के द्वारा एक बार जोड़ दीजिए ये एक तरह का इंटरनेट हो गया. बस आगे आपको इसके मेंटिनेंस पर पैसे खर्च करने होगे, टेलिकॉम कंपनी हमसे भी इसी का मेंटिनेंस का इंटरनेट इस्तेमाल करने का चार्ज लेती है.

फैली है पूरी दुनिया 

आप सबमरीन केबल्स का फैला जाल देख कर और हैरान होगे. नीचे दी गयी तस्बीर में सबमरीन केबल मैप से ली गयी है. इसमें आप देख सकते है कि कैसे पूरी दुनिया कई सारी सबमरीन केबल्स के जरिये कनेक्ट है. यह पूरा जाल ही है जो डाटा को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करता है.
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इन सबमरीन केबल्स का नेटवर्क अंटार्कटिका को छोड़कर पूरी दुनिया को कबर करता है. सबमरीन की लगभग 350 केबल्स सभी समुद्र को आपस में जोड़ती है. इन केबल्स की लम्बाई 5,50,000 मील के एरिया को कबर करती है.
ये केबल्स को आपस में जोड़ने के लिए कुछ लैंडिंग स्टेशन बनाये जाते है. भारत में इंटरनेट का बाजार बहुत बड़ा है इसलिए इसके 10 स्टेशन भारत में है. इसमें से 4 स्टेशन मुंबई, 3 चेन्नई, कोच्चि, तूतीकोरन और दीघा में एक एक स्टेशन बनाया गया है.

कैसे पंहुचता है Internet

आप जिस को बड़ी आसानी से सर्च कर लेते है वह आप तक कैसे पंहुचाता है ये बताते है. सबसे पहले आप राऊटर या अन्य डिवाइस के जरिये अपने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से कनेक्ट होते है. जब आप किसी पेज को सर्च करते है तो आप इस पेज की जानकारी के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक संदेश भेजते है. यह इलेक्ट्रॉनिक संदेश केबल के जरिये आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर तक पहुचती है. सर्विस प्रोवाइडर इस रिक्वेस्ट को DNS यानि डोमेन नेम सर्वर को भेजता है.
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रिक्वेस्ट कैसे भेजता है 
यह सर्वर सभी आईपी एड्रेस की जानकारी store करके रखते है. यह आपके रिक्वेस्ट के लिए सर्वर को सर्च करता है और आपके संदेश को उस सर्वर के होस्ट तक पहुचता है. यह होस्ट किसी और देश में होता है.
जब जानकारी वेबसाइट के सर्वर तक पहुचती है तो वो आपके संदेश को सेंस करता है. यह आपके द्वारा मागी गयी सारी जानकारी को पैकेट्स में कन्वर्ट करता है और आप तक भेजता है.
दुनिया भर का 95% इंटरनेशनल डिजिटली डाटा इसी तरह से ट्रांसफर होता है. इस तरह आपके ईमेल, फोटो, वीडियोस सभी जमीन के बहार और अंदर की केबल्स से हो कर गुजरता है. 5% इंटरनेट को सेना Operating करती है जो कि हमारी पहुच से दूर रहता है क्यों कि वे स्पेशल सैटलाइट का इस्तेमाल करती है.
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मोबाइल फ़ोन वायरलेस तकनीक पर काम करता है. इस तकनीक के तहत रेडियो वेव्स के जरिये डाटा ट्रांसफर होता है सबसे पहले मोबाइल से सिग्नल आपके सर्विस प्रोवाइडर के सेल टावर तक पहुचते है और इसके बाद आगे का प्रोसेस उसी तरह होती है.
चूकी इन केबल्स से पूरी दुनिया डिजिटली जुडी है इसलिए इन्हें मेंटेन रखना पड़ता है. सबमरीन केबल्स के डैमेज हो जाने की वजह से कभी कभी स्लो इंटरनेट की समस्या भी आती है. इन्हें शार्क या जंगली जानबरो से भी खतरा रहता है.
अगर आप window operating सिस्टम पर काम करते है Command Prompt पर 'tracent' command के आगे डोमेन डाल कर देख सकते है कि इस वेबसाइट का डाटा कहाँ कहाँ से घूम कर आपके पास आ रहा है. यह कमांड डालने से सभी जगहों के आईपी एड्रेस आते है, जिन्हें आप आईपी लोकेटर में चेक कर सकते है

भारत में इंटरनेट
भारत में इंटरनेट पहली बार 15 अगस्त 1995 को इस्तेमाल हुआ था. उस वक्त सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल ने ये सेवा दी थी. इसके बाद भारत में इंटरनेट बहुत तेजी से आगे बढ़ा. धीरे धीरे भारत में अन्य प्राइवेट कंपनी ने इंटरनेट देना शुरू कर दिया. भारत में सबसे जायदा आज के समय में Reliance Jio की सबमरीन केबल्स बिछी है जिसके कारण Jio सस्ते में इंटरनेट दे पा रहा है. Reliance Jio की सबमरीन केबल्स एशिया और अफ्रीका में भी बिछी है. Reliance 4G पर काम पिछले 5 सालो से चल रहा था जिसमे सबमरीन केबल्स को देश भर बिछाया जा रहा था. इन सबमरीन केबल्स के लिए आप Submarine Cable Map  पर देख सकते है.

        अब आपको पता चल गया होगा कि इंटरनेट कैसे काम करता है इंटरनेट की कब से शुरू हुआ है. जानकारी अच्छी लगी हो तो दोस्तों के साथ whatsaap या facebbok पर Share जरुर करें. ऐसी और रोचक पोस्टों को पढ़ने के लिए ईमेल करे.          

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